गुरुवार, 8 अप्रैल 2010

मोको कहां ढूँढे रे बन्दे














मोको कहां ढूँढे रे बन्दे,
मैं तो तेरे पास में|
ना तीरथ मे ना मूरत में,
ना एकान्त निवास में,
ना मंदिर में ना मस्जिद में,
ना काबे कैलास में,
मैं तो तेरे पास में बन्दे!
मैं तो तेरे पास में!
ना मैं जप में ना मैं तप में,
ना मैं बरत उपास में,
ना मैं किरिया करम में रहता,
नहिं जोग सन्यास में,
नहिं प्राण में नहिं पिंड में,
ना ब्रह्याण्ड आकाश में,
ना मैं प्रकुति प्रवार गुफा में,
नहिं स्वांसों की स्वांस में,
खोजि होए तुरत मिल जाउं,
इक पल की तालास में!
कहत कबीर सुनो भई साधो,
मैं तो हूं विश्वास में !!!

बुधवार, 7 अप्रैल 2010

सॉंच बराबर तप नहीं...

जाति न पूछो साधु की,
पूछ लीजिए ग्‍यान।
मोल करो तलवार के,
पड़ा रहन दो म्‍यान।।
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जिन ढूँढा तिन पाइयॉं,
गहरे पानी पैठ।
मैं बपुरा बूडन डरा,
रहा किनारे बैठ।।
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सॉंच बराबर तप नहीं,
झूठ बराबर पाप।
जाके हिरदै सॉंच है,
ताके हिरदै आप।।
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बोली एक अनमोल है,
जो कोई बोलै जानि।
हिये तराजू तौलि के,
तब मुख बाहर आनि।।
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अति का भला न बोलना,
अति की भली न चूप।
अति का भला न बरसना,
अति की भली न धूप।।
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पाहन पुजे तो हरि मिले,
तो मैं पूजूँ पहाड़।
ताते या चाकी भली,
पीस खाए संसार।।
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निंदक नियरे राखिए,
ऑंगन कुटी छवाय।
बिन पानी, साबुन बिना,
निर्मल करे सुभाय।।